हर रात में हजार राज़ छिपे होते हैं। कुछ सोच के दायरे में होते हैं, तो कुछ नहीं। बस गौर फरमाने की देरी है। सुकून की रातवो हल्की बरसात,वो हल्की ख़ामोशीवो मेरी मुझसे ही की हुई बात! एक पल काटने को दौड़ती है,और एक पल बस यही साथ होती है।कभी कभी सोचती हूँइस रात में…
Category: Poem
ख़ुद से मुलाकात
खुद की बेचैनियों से हार बैठा हूँ मैंरूह की इन आहटों से डर बैठा हूँ मैंइस दुनिया के लिए लड़ते लड़तेअपने ख़ुदा से ही रूठ बैठा हूँ मैंगुफ़्तगू जो ख़ुद से होती है. ..होती है अब वो भी मिलावटीना चाहते हुए भी इस भीड़ का हिस्साबन बैठा हूँ मैंबदलना चाहता था इस दुनिया कोलेकिनअब ख़ुद…
No Wrong or Right. Just Different.
We are unknown to the sufferings of people,everyone’s got something to deal with in their own worlds.They have their own way of dealing for which they are given tags of being good or bad and right or wrong.We have created definitions for these terms and categorised people accordingly,but forget, we the humans are made of…
पहला पन्ना
जब समाज में जन्म लेती है लड़की, कुछ अनकहा बन जाता है उसकी ज़िन्दगी का पहला पन्ना। मेरी ज़िन्दगी का पहला पन्ना, ना याद है मुझे,पर मेरी नजरों के सबूत वाला पन्ना शायद वो याद है मुझे! दर्द ख़ुशी सब जिए कुछ दर्द बयान हुए कुछ समाज से छुपा लिए,कुछ एसा था मेरे लिए मेरा…
